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mercury-12


बिखरे अलफ़ाज़ श्रृंखला-1 लाल किताब 1952 के अनुसार आज बुध 12 की बात करते हैं बुध ख़ाना नंबर 12 में होने पर ख़ाना नंबर 6 में बैठे हुए तमाम ग्रहों को बर्बाद करता है
बुध भला न मर्द के टेवे, बुरा न औरत हो
मतलब बुध खाना नंबर 12 मर्द के टेवे में हो तो बहुत बुरा असर करता है।

बुध को हड़काया कुत्ता के नाम से भी पुकारा गया है जो अपने सामने से गुजरने वालो को काटता फिरे ख़ाना नंबर 12 कुंडली का आखिर
ख़ाना नंबर 6 पाताल
बुध केतु ख़ाना नंबर 6 में इकठ्ठे माने गए हैं लाल किताब में
खाना नंबर 6 में केतु को कुत्ता व बुध को कुत्ते की दुम माना गया है
कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती ये सभी जानते हैं। कुत्ते की दुम सीधी हो गई तो कुता पागल हो जायेगा
अब उस लॉजिक पर आते हैं बुध ख़ाना नंबर 12 में जा कर हड़काया कुत्ता कैसे बना
ख़ाना नंबर 12 आसमान माना गया है लाल किताब में व खाना नंबर 6 पाताल
अब बुध खाना नंबर 12 में गया तो कुत्ते की दुम सीधी हुई यानि बुध= दुम ख़ाना नंबर 12 में
तो दुम नंबर 12 में यानि आसमान में
कुता दुम के सहारे आकाश में लटका
अब आकाश में लटकने वाला कुत्ता अपने सामने से गुजरने वाले को काटेगा ही
ख़ाना नंबर 6 से ख़ाना नंबर 12 की दृष्टि मानी गई है लाल किताब में
खाना नंबर 12 में उलटे लटकने के कारण ही बुध खाना नंबर 6 में मौजूद सभी ग्रहों को खराब करता है

farman no. 8 index

फरमान नंबर 8
Page No.
12 पक्के घर 56
लग्न का घर या कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 1 57
हर एक ग्रह की अपनी हुकूमत यानि खाना नंबर 1 में आने के वक्त दूसर ग्रहों की उसके मुकाबले में ताकत का पैमाना 59
कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 2- धर्म स्थान उम्र बुढ़ापा 60
धरम स्थान या पेशानी का दरवाज़ा 62
अंगूठा – ख्वाह हात का ख्वाह (चाहे) पाँव का 63
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 3 इस दुनिया से कूच के वक्त र्हाहे रवानगी (बीमारी वगैरा) 65
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 4 माता की गोद व पेट का ज़माना 66
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 5 औलाद मुस्तकबिल का ज़माना 68

लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 6 दुनियावी जड़ पातळ के दुनिया-रहम का खजाना, खुफ़िया मदद 69
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 7 गृहस्ती चक्की 73
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 8 – मुकाम फ़ानी 75
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 9 – आगाज़ किस्मत 77
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 10 – किस्मत की बुनियाद का मैदान 79
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 11 – गुरु अस्थान जाये इंसाफ (इंसाफ करने कराने के जगह या मुकाम मगर ख़ुद इंसाफ नहीं) या इंसानी क़िस्मत की बुनियाद 80
खाना नंबर 11 के ग्रहों की बेऐतबारी की हालत 81
खाना नंबर 11 कियाफा – पेशानी 86
लग्न कुंडली का पक्का घर खाना नंबर 12 – इंसाफ मगर इंसाफ करने करने की जगह नहीं, आरामगाह ख़्वाब- अवस्था इन्सान का सिर 90
12 ही पक्के घर मुश्तरका (मिले-जुले) 91
सोये हुए पक्के घर या पक्के घरों में बैठे मगर सोए हुए ग्रह 96

सोया ग्रह कब ख़ुद बा ख़ुद जग पड़ेगा (टेबल सारणी) 99
ग्रह दृष्टि
ग्रह द्रष्टि 101
आम हालत नंबर – 1 102
उलटे घर (आम हालत नंबर -2)
ग्रहों की बाहम (आपसी) दृष्टि व रशिओं (कुंडली के खानों) से ताल्लुक 104
100 फ़ीसदी और अपने से बाद के सातवे देखने का फ़र्क 107
ग्रह का असर-ग्रह में और ग्रह का असर दूसरे ग्रह के घर में और उनका फ़र्क 108
सेहत बीमारी-शादी और्लाद मकान वगैरह ख़ास-ख़ास चीजों की दृष्टि 110
योग दृष्टि बावक्त सेहत बीमारी (टेबल सारणी) 112
ग्रहों की बाहम (आपसी) दृष्टि के वक्त उनके मुस्तरका (मिले-जुले) असर के मिकदार (मात्रा) (टेबल सारणी) 113
योग दृष्टि (बाहमी मदद) 114
आम हालत 115

टकराव 115
बुनियादी 116
धोखा 117
मुश्तरका दिवार 117
अचानक चौट 118
कुंडली में पहले या बाद के घरों के ग्रह 119
उलझन के ग्रह 121
ऋण पितृ का ग्रह 122
ऋणों की किस्मे जैसी करनी वैसी भरनी नहीं की तूने तो कर के देख 125
ऋण पितृ की पहली हालत 128
ऋण पितृ की दूसरी हालत
जब ग्रह मुताल्लिका की जड़ में उसका दुश्मन ग्रह बैठा हो 128
ऋण पितृ के उपाय 129
महादशा का ग्रह 142

चंद्र कुंडली 144
किस ग्रह चल के वक्त महादशा होगी (टेबल सारणी) 146
धोखे का ग्रह (कैसे परख करें) 147
सूरज नंबर 12 वाली कुंडली 148
धोका के ग्रह की तलाश (सूरज नंबर 11 वाली कुंडली) 149
पेशानी में ग्रहों की तरतीब 150

lal-kitab-1952-page-no-58


और जिस वक्त टेवे में असल मंगल के इलावा मसनूई (बनावटी) मंगल नेक (सूरज-बुध) या मसनूई मंगल बाद (सूरज-शनि) दोनों ही मौजूद हों तो नंबर 1 देखेगा नंबर 11 को |

A) जब नंबर 11 खाली हो तो नंबर 1 का ग्रह अपना असर करने के ताल्लुक में मेंढे या बुध की चल पर जैसा कि वह उस वक्त टेवे में हो चलेगा | इसी तरह यही जब खाना नंबर 8 खाली हो तो नंबर 10 वाले ग्रह की आँखों को रोकने के लिए कोई रूकावट न होगी और वह खुद ही अपनी आँखों से देख भाल करता होगा |

B) जब खाना नंबर 1 में ज्यादा ग्रह हों तो खाना नंबर 1 का मुंसिफ शुक्र होगा जैसा कि इस वक्त वह टेवे (खाना नंबर 1-ही) में हो |

lal-kitab-1952-pageno-57

लग्न का घर या कुंडली का पक्का घर खाना नंबर - 1
(शाह सलामत का तख्ते बादशाही या हुज़ूर के कदम-मुबारक )
घर पहला है तख्त हजारी, ग्रहफल राज कुंडली का
ज्योतिष में इसे लग्न भी कहते, झगड़ा जहाँ रूह-माया का
ऊंच बैठे ग्रह उत्तम गिनते, दस्ती लिखा ख्वाह विधाता हो
खाली पड़ा घर 7 जब टेवे, शक्की असर कुल ग्रहण का हो
लग्न बैठा ग्रह तख्त नशीनी, राज शाही जब करता हो
आँख गिना घर आठ है उसकी, 11 से हर दम चलता हो
अकेला तख्त पर बहुत हो 7 वें, राजा वजीरी होती है
उलट मगर जब टेवे बैठे, जड़ सातवें की कटती है(१)
ऊंच-नीच(2) जो गिने घरों के, वह नहीं एक-सात लड़ते हैं
बाकि ग्रह सब झगड़ा करते, उम्र से भी चन्द्र मरते हैं
1) खाना नंबर 1 में सूरज ऊंच होगा व शनि नीच होगा और मंगल घर का ग्रह होगा और खाना नंबर 7 में शनि ऊंच होगा, सूरज नीच होगा और शुक्र घर का ग्रह होगा |
2) मसलन खाना नंबर 1 में बृहस्पत, चन्द्र, बुध राहू (चार ग्रह) और खाना नंबर 7 में अकेला केतु हो तो 34 साला उम्र (बुध की मियाद) तक नर औलाद केतु नदारद या पैदा हो कर मरती जावे और 48 साला उम्र (केतु की मियाद) तक एक ही लड़का कायम हो | अगर 48 साला उम्र से दूसरा लड़का कायम हो जाये तो बुध लड़की बेघर बेइज्जती या दीगर (पुन:, दोबारा) मंदे नतीजों में बर्बाद होगी | टेवे वाला अगर चार और जानों (कुत्ता-केतु, घोड़ा-चन्द्र, गाय-शुक्र, तोता-बुध कोई भी चार जानवर) को रोटी का हिस्सा देवे तो नर औलाद कायम होगी और औलाद पैदा होने के दिन से चन्द्र, राहू, बृहस्पत, बुध मुस्तरका (मिले-जुले) राज योग होंगे वर्ना चन्द्र, राहू, बुध, बृहस्पत के उम्दा असर के बजाये खाक की बोरी या हर तरह लानत नसीब होगी 2) तख्त पर बैठे हुए ग्रह चाली हुक्मरान राजा के अहद( जमाना, युग) में उसके लिए खाना नंबर 1(Lens) लैंज नंबर 8 (Focussing Glass) फोक्सिंग गिलास और नंबर 11 (Regulator) रेगुलेटर होगा |

lal kitab 1952 pageno 56

और जो निशान राशि का है वह राशी का दिया हुआ असर या जिस्म या वजूद होगा, इस तरह पर जब किसी बुर्ज का निशान किसी दुसरे ग्रह के घर में पाया जाये, तो कहेंगे कि वह ग्रह दूसरे ग्रह ले घर में चला गया है | मिसाल के तौर पर अगर सूरज का सितारा चन्द्र के बुर्ज पर वाकै हो, तो चन्द्र के घर में सूरज आया हुआ गिना जायेगा या अगर यही सूरज का सितारा शुक्र के बुर्ज पर हो तो सूरज को शुक्र के घर का मेहमान कहेंगे | अब सूरज और शुक्र का या सूरज और चन्द्र का जो आपस में ताल्लुक है वही असर होगा | इसी तरह से हर राशी के निशान का असर लेंगे |

यह जरूरी नहीं कि हर एक राशी का निशान ऊँगली की उसी पोरी पर वाकै हो जहाँ कि उस राशी का मुकाम मुकर्रर है, लेकिन अगर निशान अपनी मुकर्रर जगह पर ही होवे तो वह आदमी उसी राशी का होगा और अगर कोई भी निशान राशी का न पाया जाये तो हैरानी की बात नहीं ग्रहों या बुर्जों से पता चल जाएगा | फरमान नंबर 8
12 पक्के घर
प्राचीन ज्योतिष के मुताबिक जन्म कुंडली बन चुकी | उसमें दिए हुए तमाम के तमाम हिन्दसे (अंक) मिटा दिए, मगर ग्रह जहाँ-जहाँ उसमे लिखे थे वहां-वहां ही लिखे रहने दिए और फिर लगन के घर को हिन्दसा (अंक) नंबर 1 दिया गया और 12 ही घरों को तरतीबवार 1 से लेकर 12 तक हिन्दसे (अंक) लिख दिए | अब यह घर लग्न को 1 गिनकर फलादेश देखने के लिए हमेशा के लिए ही मुकर्रर नंबर के हो गये और इस इल्म (विधा) में 12 पक्के घर कहलाये |

 

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